हिंदी शायरी

दर्द शायरी

दर्द सुनाया करता है…

काग़ज़ काग़ज़ हर्फ़ सजाया करता है, तन्हाई में शहर बसाया करता है, कैसा पागल शख्स है सारी-सारी रात, दीवारों को दर्द सुनाया करता है, रो देता है आप ही अपनी बातों पर, और फिर खुद को आप हंसाया करता है।
shayari-romantic-pyar-ki-adaa
Follow by Email50
Facebook535
Instagram

दर्द सुनाया करता है…

काग़ज़ काग़ज़ हर्फ़ सजाया करता है, तन्हाई में शहर बसाया करता है, कैसा पागल शख्स है सारी-सारी रात, दीवारों को दर्द सुनाया करता है, रो देता है आप ही अपनी बातों पर, और फिर खुद को आप हंसाया करता है।
shayari-romantic-pyar-ki-adaa

दर्द सुनाया करता है…

काग़ज़ काग़ज़ हर्फ़ सजाया करता है, तन्हाई में शहर बसाया करता है, कैसा पागल शख्स है सारी-सारी रात, दीवारों को दर्द सुनाया करता है, रो देता है आप ही अपनी बातों पर, और फिर खुद को आप हंसाया करता है।
shayari-romantic-pyar-ki-adaa
Follow by Email50
Facebook535
Instagram

दर्द सुनाया करता है…

काग़ज़ काग़ज़ हर्फ़ सजाया करता है, तन्हाई में शहर बसाया करता है, कैसा पागल शख्स है सारी-सारी रात, दीवारों को दर्द सुनाया करता है, रो देता है आप ही अपनी बातों पर, और फिर खुद को आप हंसाया करता है।
shayari-romantic-pyar-ki-adaa

दर्द शायरी

एक बार पुकारेंगे तुम्हें…

तुम सुनो या न सुनो, हाथ बढ़ाओ न बढ़ाओ, डूबते-डूबते एक बार पुकारेंगे तुम्हें। ————————————- मेरे होने में किसी तौर से शामिल हो जाओ, तुम मसीहा नहीं होते हो तो क़ातिल हो जाओ। ————————————- ज़मीं छूटी तो भटक जाओगे ख़लाओं में, तुम उड़ते उड़ते कहीं आसमाँ न छू लेना। ————————————- बड़ी घुटन है, चराग़ों का क्या ख़याल करूँ, अब इस तरफ कोई मौजे-हवा निकल आये।
shayari-romantic-pyar-ki-adaa

दर्द सुनाया करता है…

काग़ज़ काग़ज़ हर्फ़ सजाया करता है,
तन्हाई में शहर बसाया करता है,
कैसा पागल शख्स है सारी-सारी रात,
दीवारों को दर्द सुनाया करता है,
रो देता है आप ही अपनी बातों पर,
और फिर खुद को आप हंसाया करता है।

एक बार पुकारेंगे तुम्हें…

तुम सुनो या न सुनो, हाथ बढ़ाओ न बढ़ाओ, डूबते-डूबते एक बार पुकारेंगे तुम्हें। ————————————- मेरे होने में किसी तौर से शामिल हो जाओ, तुम मसीहा नहीं होते हो तो क़ातिल हो जाओ। ————————————- ज़मीं छूटी तो भटक जाओगे ख़लाओं में, तुम उड़ते उड़ते कहीं आसमाँ न छू लेना। ————————————- बड़ी घुटन है, चराग़ों का क्या ख़याल करूँ, अब इस तरफ कोई मौजे-हवा निकल आये।
shayari-romantic-pyar-ki-adaa

दर्द सुनाया करता है…

काग़ज़ काग़ज़ हर्फ़ सजाया करता है,
तन्हाई में शहर बसाया करता है,
कैसा पागल शख्स है सारी-सारी रात,
दीवारों को दर्द सुनाया करता है,
रो देता है आप ही अपनी बातों पर,
और फिर खुद को आप हंसाया करता है।